बरारी में पंचायत सरकार भवन निर्माण कार्य में भारी अनियमितता का आरोप।
बरारी प्रखंड क्षेत्र के गुरुमेला पंचायत में लगभग तीन करोड़ की लागत राशि से पंचायत सरकार भवन का निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें भारी अनियमितता का आरोप लगाया जा रहा है। जानकारी हो कि भवन निर्माण में पहली मंजिल की छत ढलाई की जा चुकी है,साथ ही दूसरी मंजिल की ढलाई के लिए सेंटरिंग कर सरिया बिछाया जा चुका है। जिसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ता राज किशोर यादव तथा एलजेपी के जिला महासचिव शिवपूजन पासवान के द्वारा निर्माण स्थल पर पहुंचकर कार्य देख कर उन्होंने बताया कि अभी तक कार्यस्थल पर एस्टीमेट बोर्ड या योजना से संबंधित कोई बोर्ड नहीं लगाया गया है,जिस कारण भवन निर्माण कार्य की गुणवत्ता का पता नहीं चल पा रहा है,की किस कंपनी की सीमेंट और कितने एमएम सरिया का इस्तेमाल करना है। साथ ही निर्माण कार्य में मानक के अनुसार सेटिस्फाइड ब्रांडेड कंपनी की सरिया का इस्तेमाल करना है।किंतु संवेदक के द्वारा लोकल कंपनी और कम मात्रा में सेटिस्फाइड ब्रांडेड कंपनी का सरिया मिला कर अनियमितता भरी निर्माण कार्य किया जा रहा है। साथ ही निर्माण कार्य में प्रयोग होने वाली गिट्टी और ईट भी दोयम दर्जे की है,संवेदक के द्वारा घोर अन्याय की जा रही है,सब कमिशन का खेल हैै,60 40 का खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह बाढ़ ग्रस्त इलाका है, इस भवन को और बेहतर बनाना चाहिए था,सरकारी पैसे का बंदर बाट किया जा रहा है। निर्माण कार्य में भारी अनियमितता की जा रहा हैं। जिला पदाधिकारी से जांच कर सही ढंग से निर्माण कार्य करवाने की मांगी है। वहीं दूसरी तरफ इस संबंध में विभाग के एसडीओ अंकित कुमार ने दूरभाष पर जानकारी देते हुए कहा कि, लगभग 3 करोड़ की लागत से भवन निर्माण कराया जा रहा है,जिसमें 4/5 अप्रूव्ड सेटिस्फाइड ब्रांडेड कंपनी की सरिया का इस्तेमाल करना है। अगर अनियमितता है,तो क्रॉस वेरिफिकेशन की जाएगी।
ऐसे निर्माण पर बड़े प्रश्न उठते हैं,कि क्या इस प्रकार के निर्माण कार्य से भवन की गुणवत्ता पर अभी से ही ग्रहण लगता दिख रहा है।जहां एक तरफ सरकार हर क्षेत्र में शून्य सहनशीलता (zero tolerance) नीति की बात करती है,तो वहीं दूसरी तरफ सरकारी योजना में संवेदक के द्वारा सरकारी तथा भोले भाले नागरिकों के पैसों का खुलेआम बंदर बाट किया जा रहा है।
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